Friday, 13 January 2017

हॉलमार्किंग के नियम में आए बदलाव, मिलेगा शुद्ध सोना


नई दिल्ली: सोने खरीदने से पहले हमारे जहन में उसकी शुद्धता को लेकर कई सवाल होते हैं, ऐसे में हम सोने पर हॉलमार्क देख कर उसकी पहचान करते हैं,लेकिन अब शुद्धता मापने के नियमों में काफी बदलाव आ गया है। जिसके बाद आप सोने को और भी परख कर खरीद सकते हैं। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (बीआईएस) ने 1 जनवरी से सोने की शुद्धता मापने के नियमों में परिवर्तन कर दिया है।
बीआईएस के नए नियम के मुताबिक देश में हॉलमार्क सोने की ज्वैलरी अब तीन ग्रेड 14 कैरट, 18 कैरट और 22 कैरट में उपलब्ध होगी। हॉलमार्की की गई ज्वैलरी पर अब 4 तरह के निशान मौजूद रहेंगे। पहला, बीआईएस मार्क, दूसरा प्योरिटी(कैरेट में), तीसरा सोने में खारापन (उदाहरण 22 कैरेट सोने के लिए 22के916) और चौथा ज्वैलर्स के निशान के साथ-साथ हॉलमार्किग सेंटर की पहचान होगी।
आपको बता दें कि भारत में हॉलमार्किंग प्रक्रिया न सिर्फ गोल्ड मॉनेटाईजेशन स्कीम को सफल बनाने के लिए की जाती है बल्कि इसके सहारे देश से सोने की ज्वैलरी के निर्यात को बढ़ाना भी है। वैसे तो हमारे देश में सोने की हॉलमार्किंग प्रक्रिया कानूनी तौर पर जरूरी नहीं है,लेकिन इसे सोने की शुद्धता पर मुहर लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
गौरतलब है कि हाल ही में वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने भारत में हॉलमार्क किए गए सोने की शुद्धता अलग-अलग पाई थी जिसके बाद काउंसिल ने दावा किया था कि देश में महज 30 फीसदी ज्वैलरी हॉलमार्क की हुई है और देश के हॉलमार्किंग केन्द्रों की भूमिका पर भी सवाल उठाया था।

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